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Dushyant Kumar
हो गई है पीर पर्वत - सी पिघलनी चाहिए , इस हिमालय से कोई गंगा निकलनी चाहिए । हर सड़क पर , हर गली में , हर नगर , हर गाँव में , हाथ लहराते हुए , हर लाश चलनी चाहिए । आज यह दीवार , पर्दों की तरह हिलने लगी , शर्त लेकिन थी कि ये बुनियाद हिलनी चाहिए । सिर्फ हंगामा खड़ा करना मेरा मकसद नहीं , मेरी कोशिश है कि यह सूरत बदलनी चाहिए । मेरे सीने में नहीं तो तेरे सीने में सही , हो कहीं भी आग लेकिन आग जलनी चाहिए ।
Motivational
तिलक तराज़ू और तलवार इनको मारो जूता चार । Cm मायावती सरकार Pm हांथी नहीं गणेश है ब्रम्हा विष्णु महेश है जिंदगी हो या गाड़ी , जितेगा वही, जो टाइम पे गेयर चेंज करेगा । अगर आपको राजा बनने का शौक है , तो गुलाम की तरह मेहनत करना सीखो। कभी कभी गुच्छे की , आखरी चाबी भी ताला खोल देता है। जिस काम में , काम करने की हद पार ना हो, वो काम , किसी काम का नहीं ।








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